सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

गाँव में पहली बारीश


  1. भारत एक कृषि प्रधान देश है और भारतीय संसकृति गाँव में लम्बे समय से सहेजी हुई मिल जायेगी।
जब गाँव में पहली बरसात होती हैं तब पुरे गांव मे खुशी का माहोल एक अलग सी रौनकें  सब के मुंह पर एक ही बात सबका मिलना बेठ्ना ओर बरसात का जायका लेना,हा इसे दिवाली के त्योहार जितना ही खास मान सकते हैं,क्योकी एक किशान के लिये बारिश के मौसम से बढकर ओर कौनसा त्योहार हो सकता है ।
बरसात का असली आन्नद ओर महत्व किशान से बढकर कोई नही समझ सकता।
आज हमारे गाँव में पहली बारिश हुई है।
ओर अब खेत जूतेन्गे, बीज बोये जायेंगे ओर चारो तरफ हरियाली होगी ।
और एक अलग सी खुशी काम करने के जूनून के साथ ।
ओर खासकर उस किशान की खुशी जिससे वो इस साल अपने ओर अपने पुरे परिवार की जरूरते हंसते हंसते पूरी कर पायेगा ।

धन्यवाद 
मेरा यह छोटा सा आलेख पढने के लिये 
 मुझे गर्व है की मे भारत के एक गांव से हूँ ।
amavillager.blogspot.com

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आजादी को प्यारे पँछी,Hindi poem by Anita Deora -www.amavillager.blogspot.com

Am a villager  आजादी को प्यारे पंछी ,सोने के पिंजरों से अनीति रखते हैं,  देर तक रहने वाले खामोश,बाहर आते ही शोर करते हैं, समझाइश या तो ज्यादा है उन्हें या हैं ही नही, तभी वो विचार नही कर पाते उड़ना जरूरी हैं,  या समय की ख़बर रखना,की आना है वापस सांझ को घर, यह डर उन्हें बाहर निकलने देता ही नही, की हुनर रखते हैं जो उड़ने का भी ओर ठहरने का भी, वो थोड़े हंस जाते हैं उन पर, गर हंसने से सूंकूँ मिले उनको तो उनके साथ मुस्करा देने में कोई गम नही,मगर वो आते हैं पँखो को काटने तो सामना करने से कतराते नही, की मिले इतनी हिम्मत की कटरता से जवाब दे सके, पर यहां भी कुछ हालातो से समझौता कर जाते हैं,  हम अनु बो हैं जो मिले या ना मिले पर  रब की मर्जी मानकर खुश रहना सिख जाते हैं,  तोह आती हैं देर से ही सही एक बात जहन में  जब कोई मसला ही नही फिर मलाल कैसा डर का,  फिर अनीति को नीति बनाने की जिद क्यों कर जाते हैं ,  खुद से...।।     ।। आभार ।।  ➡️ Visit blog Am a villager       Also read   ➡️    वो स्तब्ध सी,शिवा तुझमें प...

मेरे गांव में शिक्षा के आयाम

आज के समय में शिक्षा के बिना कुछ भी संभव नहीं है ओर अब शिक्षा के आयाम भी बदल रहे है । टेक्नोलोजी ओर कम्प्यूटर के साथ शिक्षा के बदलते रूप नजर आ रहें है ओर आने भी चाहिये। में यहाँ बालिका शिक्षा पर थोड़ा सा ध्यान देना चाहूंगी मेरे गांव में बालिका शिक्षा》 मेरे गांव में बालक-बालिकाओं  को एक समान ही महत्व दिया जाता हैं, ओर सभी शिक्षित जानते हैं की आज के समय में बेटा बेटी एक समान है । पर है तो गाँव ही ओर गांव में लोगों कि सोच कही ना कही पीछे ही है पर वो अपने आप को सही ठहराते है।  उनको लगता हैं लड़की को सेकेंडरी करवा दी तो बहुत हैं, किन्हीं को लगता हैं सीनियर सेकेंडरी ही बहुत हैं ओर यह भी सच है की कुछ तो लड़की को पढ़ाना भी जरूरी नहीं समझते । अब बात शिक्षित परिवार की यहाँ पर यह सबसे बड़ा सच हैं की यहाँ पर लड़की की शिक्षा पर ध्यान दिया जायेगा, परिवार में बेटी को  बेटे के जितना ही समान दिया जाता है। सीनियर सेकेंडरी के बाद कॉलेज में  ग्रैजुएट की डिग्री करवाते है ।पर मध्यम परिवार में यह इतना आसान नहीं हो पाता ,लड़के को शहर भेज दिया जाता हैं आगे की पढ़ाई के लिये ओर हमारे गाँव म...