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मैं अनपढ़ होती तो,शब्दों को कैसे पिरोती |हिंदी कविता |Woman thinking Hindi poem

Am a villager -                   खूबसूरती के मोहताज़ में                 एक दिन चेहरा पिला होगा,                ढ़लती उम्र के एक दौर में,                 चेहरा पिला पड़ जायेगा,              जीवित जीवन बचेगा किसमे,              शब्दों में,शब्द अमर होते हैं,         गर अनपढ़ होती मैं,जीवन कैसे जीती,    होते मेरे पास वर्ण,उनको शब्दों में कैसे पिरोती,          जीवन शब्दों में कैसे जीवित रहता।    ।।  आभार ।।   Visit blog Am a villager                 ALSO READ ONE  -    ➡️    वो स्तब्ध सी,शिवा तुझमें पूर्ण।।                            ...

आजादी को प्यारे पँछी,Hindi poem by Anita Deora -www.amavillager.blogspot.com

Am a villager  आजादी को प्यारे पंछी ,सोने के पिंजरों से अनीति रखते हैं,  देर तक रहने वाले खामोश,बाहर आते ही शोर करते हैं, समझाइश या तो ज्यादा है उन्हें या हैं ही नही, तभी वो विचार नही कर पाते उड़ना जरूरी हैं,  या समय की ख़बर रखना,की आना है वापस सांझ को घर, यह डर उन्हें बाहर निकलने देता ही नही, की हुनर रखते हैं जो उड़ने का भी ओर ठहरने का भी, वो थोड़े हंस जाते हैं उन पर, गर हंसने से सूंकूँ मिले उनको तो उनके साथ मुस्करा देने में कोई गम नही,मगर वो आते हैं पँखो को काटने तो सामना करने से कतराते नही, की मिले इतनी हिम्मत की कटरता से जवाब दे सके, पर यहां भी कुछ हालातो से समझौता कर जाते हैं,  हम अनु बो हैं जो मिले या ना मिले पर  रब की मर्जी मानकर खुश रहना सिख जाते हैं,  तोह आती हैं देर से ही सही एक बात जहन में  जब कोई मसला ही नही फिर मलाल कैसा डर का,  फिर अनीति को नीति बनाने की जिद क्यों कर जाते हैं ,  खुद से...।।     ।। आभार ।।  ➡️ Visit blog Am a villager       Also read   ➡️    वो स्तब्ध सी,शिवा तुझमें प...